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हिंदुत्व विरोधी बॉलीवुड…!

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हिंदुत्व विरोधी बॉलीवुड…!

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री यानी वॉलीवुड पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। इनमें भाई-भतीजावाद( नेपोट्ज़म), क्षेत्रवाद , गुटबाज़ी, ड्रग्स समेत तमाम मुद्दों पर खबरिया चैनलों पर तमाम तरह की चर्चा चल रही है। लेकिन इस सब के बीच एक बड़ा मुद्दा पीछे छूट गया , जिस पर बॉलीवुड पिछले लंबे वक्त से खामोशी से आगे बढ़ रहा है…,मैं बात कर रहा हूँ एंटी हिदुत्व बॉलीवुड के एजेंडे की। बॉलीवुड के ऐसे कई वाक्ये और घटनाएं हैं जो इस ओर बड़ी ही मजबूती से इशारा करती हैं तो क्या सौ करोड़ हिंदुओं के देश में मनोरंजन और सेकुलरिज्म के नाम पर हिंदुत्व को कमज़ोर करने की साज़िश चल रही है।

क्या है बॉलीवुड का एंटी हिंदुत्व एजेंडा

मुम्बई फ़िल्म इंडस्ट्री लंबे अरसे से एंटी हिंदुत्व के एजेंडे पर काम कर रही ही जिसका मकसद हिंदुस्तान की नई आबादी की हिंदुत्व से दूर करने का है। और जिस किसी ने बॉलीवुड में रहते हुए इस एजेंडे का विरोध किया उसका कॅरियर ही खत्म कर दिया जाता है। फिर चाहे वो सिंगर सोनू निगम हो, अभिजीत भट्टाचार्य हो या अरिजीत सिंह… सुशांत की मौत को भी कई लोग इसी एंटी हिंदुत्व के एजेंडे से जोड़ कर देख रहे हैं। सुशांत सिंह की मौत के मामले पर मुखर हुई अभिनेत्री कंगना रणौत खुल कर बॉलीवुड पर हिंदुत्व विरोधी होने का आरोप लगा रही हैं बकौल कंगना बॉलीवुड में अगर आप अपनी फिल्मों या दूसरे जरियों से हिंदुत्व को बढ़ावा देते हैं तो बॉलीवुड की कई गैंग्स आपके पीछे लग जाती हैं। लोगों को डराया धमकाया जाता है, उन्हें काम मिलना बंद हो जाता है। जिसके चलते या तो वे एंटी हिदुत्व एजेंडे से जुड़ने को तैयार हो जाते हैं या गुमनामी के अंधेरे धकेल दिए जाते हैं।पिछले 6 दशकों से बॉलीवुड में सुनियोजित तरीके से हिंदूत्व को बदनाम करने का नेटवर्क चल रहा है.

हिंदूत्व ही नहीं बल्कि हिन्दू समुदाय में भी एक दूसरे को विभाजित करने वाली फिल्मे राजनैतिक लाभ के लिए बनवाई जाती हैं सबको याद होगा अक्सर 15 -20 साल पहले तक ऐसी बहुत फिल्मे बनती थी, कैसे शक्तिशाली ठाकुर गरीब पिछड़े का शोषण करते हैं, उनको मारते पीटते है, मंदिर का पुजारी जिसको पंडित की वेशभूषा में चिन्हित किया जाता था वो मंदिर में हेरा फेरी करता हो, दान दक्षिणा डकार जाता है और ठाकुर लोगों के कान भरता है…और बनियो को सूदखोर, गरीब को उधार देके उसको जमीन अपने नाम करवा के बर्बाद कर देता है. ये बॉलीवूड का स्टाइल रहा है…और इन सब सताये लोगों की मदद करने वाले या तो चर्च का फादर होता था या खुदा का नेक बंदा जो मुस्लिम टोपी लगाए सबको गले लगा के उनके हकों के लिए लड़ता था…वैश्विक परिदृश्य में फ़िल्म उद्योग की ये तस्वीर बदली जरूर है लेकिन अब भारतीय परम्पराओं खास तौर पर हिन्दू रीति रिवाजों और सनातन मान्यताओं का मख़ौल खुलकर उड़ाया जा रहा है। फिल्मों ने हिन्दू समाज की नुकसान पहुचने के मकसद से ही सन्तोषी माता और साई बाबा के नाम पर फिल्में बनाकर उन्हें हिंदुओं के भगवान के रूप में प्रचारित और स्थापित किया गया। जिसका परिणाम ये है कि आज साईं बाबा के मंदिरों में लाखों करोड़ों का चढ़ावा चढ़ रहा है इतना ही नही इनके नाम पर कई तरह के दूसरे धंधे भी जम गए हैं जिससे आज का हिन्दू युवावर्ग भृमित है।

बॉलीवुड में अंडवर्ल्ड के दखल से खतरे में हिदुत्व।

पिछले 4-5 दशक से बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड का दखल काफी तेजी से बढ़ा है। फ़िल्म इंडस्ट्री की चकाचोंध और भारी मुनाफे के चलते अंडवर्ल्ड ने बॉलीवुड पर शिकंजा कसने की शुरुआत की। दाऊद इब्राहिम के अंडरवर्ल्ड में सक्रिय होने के साथ ही फ़िल्म इंडस्ट्री में अंडरवर्ल्ड का रसूख भी बढ़ता चला गया ।जिसके बाद अंडरवर्ल्ड का पैसा फिल्मों में लगने लगा।

लोगों को पता चलने लगा कि कलाकारों को काम सिर्फ हुनर और सफलता से नहीं, बल्कि अंडरवर्ल्ड के रिश्तों से भी मिलता है। नायक नायिका का ऑडिशन स्टूडियो में नहीं अपराधियों के बंगलों पर भी होता है। हर गुजरते दिन के साथ अंडरवर्ल्ड के कदमों की छाप गहरी होकर उभरती गई।

यह वो वक्त था जब हिंदी फिल्मों को पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए इधर उधर हाथ पसारना पड़ता था। उधर अंडरवर्ल्ड को कमाई के इस खूबसूरत बाजार का शौक तो पहले से ही था। जरूरत के पता चलने और भारी मुनाफे की उम्मीद ने उनमें लगाव भी पैदा कर दी। फिर शुरू हुआ दोनों की गलबहियों का दौर। कहीं बात से बात बनी तो कहीं आपसी लेन देन से और जहां दोनों काम न आया वहां डर ने अपना असर दिखाया।

आज हालात ये हैं कि किसी फिल्म को बनाने के लिए पैसा चाहिए तो फ़िल्म की कहानी में एंटी हिंदुत्व का ऐंगल बेहद जरूरी है , साथ ही फ़िल्म का विलेन या तो हिन्दू धर्म को मानने वाला हो या फिर कोई बाबा या साधुसंत हो ये भी जरूरी है । इतना ही नही फ़िल्म की स्टारकास्ट म्यूजिक डायरेक्टर, डांस डायरेक्टर सिंगर सभी अंडरवर्ल्ड तय करता है। इसका मकसद मुनाफा कमाने के साथ साथ पिछले दरवाजे से हिंदुत्व पर आघात करना भी होता है। फिल्मों की, “कहानियां” लिखने का काम भी, “सलीम खान और जावेद अख्तर” जैसे “मुस्लिम लेखकों” के “इर्द-गिर्द” ही रहा।

जिनकी- “कहानियों” में, एक “भला-ईमानदार” ….मुसलमान,

एक “पाखंडी” ब्राह्मण

एक “अत्याचारी” – “बलात्कारी” क्षत्रिय

एक “कालाबाजारी” वैश्य

एक “राष्ट्रद्रोही”नेता*

एक “भ्रष्ट” पुलिस अफसर

और एक “गरीब” दलित महिला,

ये – होना, लोन की “अनिवार्य” शर्त है।!

एक समय था, जब “मुसलमान एक्टर” “हिंदू नाम” रख लेते थे
क्योंकि, उन्हें डर था, कि अगर “दर्शकों” को उनके “मुसलमान” होने का, “पता” लग गया …तो, उनकी “फिल्म” देखने, कोई नहीं आएगा।

ऐसे लोगों में, “सबसे मशहूर” नाम “युसूफ खान” का है …जिन्हें, “दशकों” तक, हम “दिलीप कुमार” समझते रहे। “महजबीन अलीबख्श”, “मीना कुमारी” बन गई…और “मुमताज बेगम जहाँ देहलवी”, “मधुबाला” बनकर, हिंदू ह्रदयों पर, “राज” करतीं रहीं। “बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी” को हम – “जॉनी वाकर” समझते रहे ….”हामिद अली खान” विलेन “अजित” बनकर, काम करते रहे। मशहूर “अभिनेत्री” रीना राय” का, असली नाम “सायरा खान” था।

ऐसे दर्जनों छोटे बड़े कलाकर थे जिन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री में टिके रहने और नाम कमाने के लिए हिन्दू नाम और पहचान का सहारा लिया। लेकिन आज हालात बदल गए हैं ।पिछले 2 दशकों से ऐसा प्रचारित किया जाता रहा है कि सलमान खान, शाहरुख खान और अमीर खान किसी फिल्म के हिट होने की गारंटी है। हालांकि अक्षय कुमार, अजय देवगन, सुशांत सिंह राजपूत, विद्युत जामवाल ,रणबीर सिंह और ताज़ा सुपरस्टार कार्तिक आर्यन जैसे कलाकारों ने इस मिथक को कई कई बार तोड़ा है। लेकिन एक बड़ी गैंग आज भी बॉलीवुड में सक्रिय है।

हिन्दू आर्टिस्टों को किया जाता है प्रताड़ित

बॉलीवुड में आज कई गैंग सक्रिय हैं जो हिन्दू आर्टिस्टों को प्रताड़ित करने का काम कर रही हैं। फिर चाहे वो हीरो हीरोइन हो सिंगर, म्यूज़िक डायरेक्टर , फाइट मास्टर या फिर डायरेक्टर ही क्यों न हो। अगर ये लोग इन तथाकथित गैंग्स के इशारे पर काम न करें तो या तो इनका हश्र गुलशन कुमार सुशांत सिंह राजपूत जैसा होता है या फिर सोनू निगम , अभिजीत और अरिजीत सिंह जैसे इन्हें बॉलीवुड से बायकॉट कर दिया जाता है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लगातार हिट फिल्में दे रहे सुशांत पर भी गैंग के इशारे पर काम करने का भारी दबाव बनाया गया था ,जिसके चलते अपनी मौत के पहले 6 महीनों में सुशांत को 7 फिल्मों से हाथ धोना पड़ा था। खबरों के मुताबिक इस एन्टी हिंदुत्व गैंग का अगला टारगेट कार्तिक आर्यन बनने वाले थे लेकिन सुशांत की मौत से मचे बवाल ने उन्हें बचा लिया। हालांकि सुशांत केस की जांच अब सीबीआई के हाथों में हैं लेकिन बॉलीवुड के इस एन्टी हिंदुत्व एजेंडे की भी जांच बड़े स्तर पर कराना बेहद जरूरी है।

Posted By –  Vineet Pathak

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